Govt. Sanskrit College, Dangar,Teh. Ghumarwin, Distt. Bilaspur (H.P.)
मुख्य पृष्ठ» शैक्षणिक» प्रवेश नियम

प्रवेश नियम


प्राक्शास्त्री

प्राक्शास्त्री प्रथम वर्ष में प्रवेश के नियम

प्राक्शास्त्री प्रथम वर्ष में वे सभी छात्र प्रवेश के पात्र होंगे जो मान्यता प्राप्त परिषद (बोर्ड) की दसवीं कक्षा उत्तीर्ण हों। इसके अतिरिक्त जिन्होंने पूर्वमध्यमा द्वितीय खंड की परीक्षा अथवा विद्याधिकार परीक्षा उत्तीर्ण की हो, वे भी प्राक्शास्त्री प्रथम वर्ष में प्रवेश के योग्य होंगे।

प्राक्शास्त्री द्वितीय वर्ष में प्रवेश के नियम

प्राक्शास्त्री द्वितीय वर्ष में केवल वे ही छात्र प्रवेश प्राप्त कर सकते हैं जो प्राक्शास्त्री प्रथम वर्ष की परीक्षा उत्तीर्ण हों।

आयु

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पत्र संख्या 4-20/2015-एच.पी.यू. (शै.) दिनांक 23 जून 2017 के अनुसार प्राक्शास्त्री प्रथम वर्ष, प्राक्शास्त्री, विशिष्ट शास्त्री और आचार्य कक्षाओं में प्रवेश के लिए आयु संबंधी वे ही नियम लागू होंगे जिनका उल्लेख हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के अध्यादेश के 3.3 (ए) अनुच्छेद में किया गया है।

शास्त्री उपाधि

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के अधिनियम 2002 Vol. 1 Chapter 5.3 (L) तथा Chapter 8.80-81 के अनुसार शास्त्री का अभिप्राय ऐसा पाठ्यक्रम है जिसमें विद्यार्थी निर्धारित अवधि में केवल संस्कृत के विभिन्न पाठ्यक्रमों का अध्ययन करता है। चूँकि ये पाठ्यक्रम केवल एक विषय (संस्कृत) तक सीमित हैं, अतः इस प्रकार के पाठ्यक्रम को अपनाकर उत्तीर्ण विद्यार्थी स्नातक कक्षा के समकक्ष नहीं होता। इसी कारण शास्त्री परीक्षा उत्तीर्ण छात्र स्नातकोत्तर कक्षा में प्रवेश का पात्र नहीं होता। परंतु हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के 2002, VOL.1.1, 8.77 अध्यादेश की व्याख्या के अनुसार शास्त्री परीक्षा उत्तीर्ण / लिखितानुपूरक परीक्षा उत्तीर्ण विद्यार्थी आचार्य प्रथम वर्ष की कक्षा में प्रवेश प्राप्त कर सकता है।

शास्त्री उपाधि हेतु प्रवेश नियम

शास्त्री प्रथम वर्ष में प्रवेश के लिए वे सभी छात्र योग्य होंगे जिन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के प्राक्शास्त्री प्रथम वर्ष और प्राक्शास्त्री द्वितीय वर्ष उत्तीर्ण किए हों। इसके अतिरिक्त वे सभी विद्यार्थी भी शास्त्री प्रथम वर्ष में प्रवेश प्राप्त कर सकेंगे जिन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय द्वारा स्वीकृत या मान्यता प्राप्त संस्थानों से प्राक्शास्त्री प्रथम वर्ष या द्वितीय वर्ष की समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण की हो। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने सन् 2022 के दिसंबर मास की 13 तारीख को अधिसूचित किया है कि जिन्होंने +2 कक्षा संस्कृत विषय में उत्तीर्ण नहीं की है, वे छात्र भी शास्त्री प्रथम वर्ष में प्रवेश के योग्य हैं। किंतु ऐसे छात्रों को शास्त्री प्रथम वर्ष में अनुवाद के एक पत्र में उत्तीर्ण होना होगा। इस पत्र में प्राप्त अंकों का योग कुलांक में नहीं जोड़ा जाएगा। परीक्षा पत्र 50 अंकों का होगा। इसका पाठ्यक्रम निम्नानुसार होगा—

परीक्षा पाठ्यक्रम

शब्दरूप — राम, लता, ज्ञान, अस्मद्, युष्मद्, तत्।
धातुरूप — भू, पठ्, अस्, क्रीड्, चुर्।
लकार — लृट्, लट्, लोट्, लङ्।
विभक्ति परिचय, दस वाक्यों का कर्तृवाच्य में अनुवाद, दस वाक्य कर्मवाच्य में।
इस परीक्षा में उत्तीर्ण छात्र शास्त्री प्रथम वर्ष में प्रवेश के योग्य होंगे।

आयु सीमा

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पत्र संख्या 4-20/2015-एच.पी.यू.(शै.) दिनांक 23 जून 2017 के अनुसार प्राक्शास्त्री, विशिष्ट शास्त्री और आचार्य कक्षाओं में आयु सीमा के वे सभी नियम मान्य होंगे जिनका उल्लेख हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के आदेश 3.3 ए. अनुच्छेद में है।

विशिष्ट शास्त्री

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के अध्यादेश 2002 ए. खंड-1, 8.70 तथा 8.71 के अनुसार विशिष्ट शास्त्री का अभिप्राय ऐसा पाठ्यक्रम है जिसमें विशिष्ट शास्त्री के लिए निर्धारित अवधि में संस्कृत पाठ्यक्रमों के अतिरिक्त दो संस्कृतेतर पाठ्यक्रमों का भी अध्ययन किया जाता है। इन दोनों संस्कृतेतर पाठ्यक्रमों के साथ आंग्ल पाठ्यक्रम भी पढ़ना आवश्यक है जो स्नातक कक्षा (बी.ए.) में पढ़ाया जाता है। आंग्ल भाषा के अतिरिक्त स्नातक कक्षा में पढ़ाए जाने वाले किसी अन्य (Elective additional) विषय का चयन विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार कर सकता है। परंतु यह विषय विशिष्ट शास्त्री कक्षा में पढ़े जा रहे संस्कृत पाठ्यक्रम के विषयों से अलग होना चाहिए।

अनिवार्य टिप्पणी

अतिरिक्त अनिवार्य / संस्कृतेतर विषयों (additional Elective/non Sanskrit Subject) के साथ विशिष्ट शास्त्री परीक्षा उत्तीर्ण छात्र संस्कृत की स्नातकोत्तर कक्षा, अन्य संस्कृतेतर स्नातकोत्तर कक्षाओं, शिक्षाशास्त्र कक्षा (बी.एड.), एल.एल.बी. आदि कक्षाओं में प्रवेश का पात्र होगा। इसके अतिरिक्त विशिष्ट शास्त्री परीक्षा उत्तीर्ण विद्यार्थी भारतीय प्रादेशिक परीक्षाओं जैसे प्रशासनिक, न्यायिक, आरक्षक विभाग आदि की परीक्षाओं और नियुक्तियों के लिए भी अर्ह होगा। आशय यह है कि विशिष्ट शास्त्री पदवी धारक की सभी अर्हताएँ वही होंगी जो कला स्नातक (बी.ए.) की होती हैं। विद्यालयों में संस्कृत अध्यापक के रूप में नियुक्ति के लिए शास्त्री पदवी प्राप्त विद्यार्थी अर्ह होगा।

शास्त्री एवं विशिष्ट शास्त्री

सभी कक्षाओं के छात्रों के लिए व्याकरण और साहित्य अनिवार्य विषय हैं। वेद, दर्शन और ज्योतिष में से कोई दो विषय ऐच्छिक के रूप में चुने जाते हैं। विशिष्ट शास्त्री के लिए संस्कृत के चार विषयों के साथ कला स्नातक कक्षा के दो विषय (इतिहास, राजनीति शास्त्र, आंग्ल तथा हिंदी में से कोई) चुनने का विकल्प है। कला स्नातक के दो विषयों का अध्ययन करने वाले छात्र ही विशिष्ट शास्त्री उपाधि प्राप्त कर सकेंगे।

प्राक्शास्त्री एवं शास्त्री कक्षाओं में प्रवेश हेतु आवश्यक प्रमाण पत्रों की सूची

1. आवेदन पत्र।
2. दसवीं कक्षा का प्रमाण पत्र (छायाप्रति)।
3. +2 कक्षा का प्रमाण पत्र।
4. छात्र के दो फोटो।
5. विद्यालय त्याग प्रमाण पत्र।
6. चरित्र प्रमाण पत्र।
7. एससी/एसटी/ओबीसी/आईआरडीपी/बीपीएल/अल्पसंख्यक समुदाय/दिव्यांगता आदि का प्रमाण पत्र यदि हो तो (छायाप्रति)।
8. आधार प्रमाण पत्र (छायाप्रति)।
9. हिमाचल प्रदेश का स्थायी निवास प्रमाण पत्र।
10. यदि पात्रता परीक्षा हिमाचल प्रदेश के अलावा किसी अन्य प्रदेश के बोर्ड या विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की गई हो तो प्रव्रजन प्रमाण पत्र आवश्यक है।