राजकीय संस्कृत महाविद्यालय, डंगार

राजकीय संस्कृत महाविद्यालय, डंगार पिछले 44 वर्षों से संस्कृत और संस्कृति की निष्ठापूर्वक सेवा कर रहा है। डंगार ग्राम स्थित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर के प्रांगण में विद्याप्रेमी डॉ. दीनानाथ शर्मा महोदय द्वारा इस क्षेत्र में भारतीय विद्या के संरक्षण और सांस्कृतिक शिक्षा के संवर्धन के लिए सन् 1982 के अप्रैल मास में रामनवमी के पावन दिन श्री सरस्वती संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना की गई। उस समय इस महाविद्यालय की प्रबंध समिति के संरक्षक पंडित सीताराम शर्मा (भूतपूर्व संसदीय सचिव) थे तथा समिति के अध्यक्ष श्री लक्ष्मण दत्त शास्त्री और उपाध्यक्ष लच्छू राम महाजन (भूतपूर्व प्रधान) थे। इनके नेतृत्व में वर्तमान भवन के निर्माण तक महाविद्यालय श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में ही संचालित होता रहा।
इस महाविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था प्रथम प्राचार्य श्री जगमोहन मंगलेट, व्याकरणाचार्य द्वारा अधिष्ठित थी। उन्होंने यह कार्य सन् 1983 तक संभाला। उसके बाद महाविद्यालय के संस्थापक डॉ. दीनानाथ शर्मा ने अपनी सरकारी सेवा छोड़कर प्राचार्य पद का दायित्व स्वीकार किया और सन् 2014 तक निरंतर इस पद पर रहे।
1983-84 में समाज और सरकारी विभागों के सहयोग से महाविद्यालय का भवन निर्मित हुआ। इस महाविद्यालय में शास्त्री, प्रभाकर और आचार्य पाठ्यक्रम संचालित होते रहे। उनकी परीक्षाओं में महाविद्यालय के छात्र प्रतिवर्ष विश्वविद्यालय की मेरिट सूची में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करते रहे। इस महाविद्यालय से उत्तीर्ण छात्र विभिन्न सरकारी पदों पर नियुक्त हुए हैं – जैसे विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में प्राध्यापक, भारतीय सेना में धर्मगुरु, विद्यालयों में प्रवक्ता, शास्त्री अध्यापक, अधीक्षक तथा अन्य विभिन्न सरकारी सेवा स्थानों पर। सन् 2021 में हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस महाविद्यालय का अधिग्रहण किया।
